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mahabharat 1.169.50: पूर्वकाल में इंद्र ने वृत्रासुर को मारने के लिए जो वज्र बनाया था, वह वृत्रासुर के सिर पर लगते ही दस बड़े और एक सौ छोटे टुकड़ों में टूट गया।   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.169.50 
पुरा कृतं महेन्द्रस्य वज्रं वृत्रनिबर्हणम्।
दशधा शतधा चैव तच्छीर्णं वृत्रमूर्धनि॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में इंद्र ने वृत्रासुर को मारने के लिए जो वज्र बनाया था, वह वृत्रासुर के सिर पर लगते ही दस बड़े और एक सौ छोटे टुकड़ों में टूट गया।
 
The thunderbolt that had been created in the past for Indra to kill Vritraasura, broke into ten large and one hundred small pieces as soon as it struck Vritraasura's head.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)