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mahabharat 1.169.49: वे घोड़े देवताओं और गन्धर्वों के वाहन हैं। उनके शरीर की कान्ति दिव्य है। वे मन के समान तीव्रगामी हैं और आवश्यकतानुसार दुबले-पतले तथा मोटे होते हैं; किन्तु उनकी गति कभी कम नहीं होती ॥ 49॥   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  1.169.49 
देवगन्धर्ववाहास्ते दिव्यवर्णा मनोजवा:।
क्षीणाक्षीणा भवन्त्येते न हीयन्ते च रंहस:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
वे घोड़े देवताओं और गन्धर्वों के वाहन हैं। उनके शरीर की कान्ति दिव्य है। वे मन के समान तीव्रगामी हैं और आवश्यकतानुसार दुबले-पतले तथा मोटे होते हैं; किन्तु उनकी गति कभी कम नहीं होती ॥ 49॥
 
Those horses are the vehicles of the gods and Gandharvas. The lustre of their bodies is divine. They are as swift as the mind and are lean and fat as per the need; but their speed never decreases. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)