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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  1.169.47 
विद्यया ह्यनया राजन् वयं नृभ्यो विशेषिता:।
अविशिष्टाश्च देवानामनुभावप्रदर्शिन:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! इसी ज्ञान के कारण हम मनुष्यों से श्रेष्ठ माने जाते हैं और देवताओं के समान प्रभाव दिखा सकते हैं ॥47॥
 
O King! It is because of this knowledge that we are considered superior to humans and can show influence like the gods. ॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)