Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.169.45: तीनों लोकों में जो कुछ भी है, जो कुछ भी मनुष्य अपनी आँखों से देखना चाहता है, इस ज्ञान के बल से कोई भी उसे देख सकता है और जिस रूप में देखना चाहता है, उसे देख सकता है ॥ 45॥ | mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तीनों लोकों में जो कुछ भी है, जो कुछ भी मनुष्य अपनी आँखों से देखना चाहता है, इस ज्ञान के बल से कोई भी उसे देख सकता है और जिस रूप में देखना चाहता है, उसे देख सकता है ॥ 45॥
Whatever is there in the three worlds, whatever one wishes to see with one's eyes, through the power of this knowledge anyone can see it and can see it in whatever form one wishes to see it. ॥ 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥