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mahabharat 1.169.43: यह चक्षुसि नामक ज्ञान है, जिसे मनु ने सोम को दिया, सोम ने विश्वावसु को दिया और विश्वावसु ने मुझे दिया ॥43॥   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  1.169.43 
चाक्षुषी नाम विद्येयं यां सोमाय ददौ मनु:।
ददौ स विश्वावसवे मम विश्वावसुर्ददौ॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
यह चक्षुसि नामक ज्ञान है, जिसे मनु ने सोम को दिया, सोम ने विश्वावसु को दिया और विश्वावसु ने मुझे दिया ॥43॥
 
This is the knowledge called Chakshusi, which Manu gave to Som, Som gave to Vishwavasu and Vishwavasu gave it to me. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)