Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.169.39: (आज की पराजय से) मुझे सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि दिव्यास्त्रधारी अर्जुन को मैंने (मित्र के रूप में) प्राप्त कर लिया है और अब मैं उसे गन्धर्वों की माया से मिलाना चाहता हूँ ॥39॥   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.169.39 
साध्विमं लब्धवाँल्लाभं योऽहं दिव्यास्त्रधारिणम्।
गान्धर्व्या माययेच्छामि संयोजयितुमर्जुनम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
(आज की पराजय से) मुझे सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि दिव्यास्त्रधारी अर्जुन को मैंने (मित्र के रूप में) प्राप्त कर लिया है और अब मैं उसे गन्धर्वों की माया से मिलाना चाहता हूँ ॥39॥
 
The greatest benefit to me (from today's defeat) is that I have obtained Arjuna, the bearer of divine weapons (as a friend) and now I wish to unite him with the illusion of the Gandharvas. ॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)