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mahabharat 1.169.38: गंधर्व ने कहा - अर्जुन! मैं पराजित हो गया हूँ, अतः मैं अपना पूर्व नाम अंगारपर्ण त्यागता हूँ। अब मैं न तो सार्वजनिक रूप से अपने बल का बखान करूँगा और न ही इस नाम से अपना परिचय दूँगा। 38.   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.169.38 
गन्धर्व उवाच
जितोऽहं पूर्वकं नाम मुञ्चाम्यङ्गारपर्णताम्।
न च श्लाघे बलेनाङ्ग न नाम्ना जनसंसदि॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
गंधर्व ने कहा - अर्जुन! मैं पराजित हो गया हूँ, अतः मैं अपना पूर्व नाम अंगारपर्ण त्यागता हूँ। अब मैं न तो सार्वजनिक रूप से अपने बल का बखान करूँगा और न ही इस नाम से अपना परिचय दूँगा। 38.
 
The Gandharva said - Arjun! I have been defeated, so I give up my earlier name Angarparna. Now I will not boast of my strength in public nor will I introduce myself by this name. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)