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mahabharat 1.169.35: गंधर्वी बोली- हे महात्मन! कृपया मेरी रक्षा करें और मेरे पति को मुक्त करें। हे प्रभु! मैं कुंभिन की गंधर्व पत्नी आपकी शरण में आई हूँ।   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.169.35 
गन्धर्व्युवाच
त्रायस्व मां महाभाग पतिं चेमं विमुञ्च मे।
गन्धर्वी शरणं प्राप्ता नाम्ना कुम्भीनसी प्रभो॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
गंधर्वी बोली- हे महात्मन! कृपया मेरी रक्षा करें और मेरे पति को मुक्त करें। हे प्रभु! मैं कुंभिन की गंधर्व पत्नी आपकी शरण में आई हूँ।
 
The Gandharvi said— O great one! Please protect me and release my husband. O Lord! I, the Gandharva wife of Kumbhina, have come to your refuge.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)