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श्लोक  1.169.34 
युधिष्ठिरं तस्य भार्या प्रपेदे शरणार्थिनी।
नाम्ना कुम्भीनसी नाम पतित्राणमभीप्सती॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
उस गंधर्व की पत्नी का नाम कुंभिनसी था। उसने अपने पति के प्राण बचाने के लिए महाराज युधिष्ठिर से शरण ली।
 
The name of that Gandharva's wife was Kumbhinaasi. She sought refuge from Maharaja Yudhishthira to save her husband's life.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)