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mahabharat 1.169.30: अग्निवेश ने इसे भारद्वाज से प्राप्त किया था और मेरे गुरु द्रोणाचार्य ने इसे अग्निवेश से प्राप्त किया था। तब महाबली ब्राह्मण द्रोणाचार्य ने मुझे यह उत्तम अस्त्र प्रदान किया था ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.169.30 
भरद्वाजादग्निवेश्य अग्निवेश्याद् गुरुर्मम।
साध्विदं मह्यमददद् द्रोणो ब्राह्मणसत्तम:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
अग्निवेश ने इसे भारद्वाज से प्राप्त किया था और मेरे गुरु द्रोणाचार्य ने इसे अग्निवेश से प्राप्त किया था। तब महाबली ब्राह्मण द्रोणाचार्य ने मुझे यह उत्तम अस्त्र प्रदान किया था ॥30॥
 
Agnivesha received it from Bharadwaj and my Guru Dronacharya received it from Agnivesha. Then the great Brahmin Dronacharya gave me this excellent weapon. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)