Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.169.25: वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! अर्जुन के वचन सुनकर अंगारपर्ण अत्यन्त क्रोधित हो गया और उसने धनुष को झुकाकर विषैले सर्पों के समान तीखे बाण चलाने आरम्भ किये। | mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! अर्जुन के वचन सुनकर अंगारपर्ण अत्यन्त क्रोधित हो गया और उसने धनुष को झुकाकर विषैले सर्पों के समान तीखे बाण चलाने आरम्भ किये।
Vaishmpayana says: Janamejaya! On hearing Arjuna's words, Angarparna became very angry, and bowing his bow, he began to shoot sharp arrows like poisonous snakes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥