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mahabharat 1.169.24: जिसे कोई रोक नहीं सकता तथा जहाँ पहुँचने में कोई बाधा नहीं है, उस पवित्र भागीरथी के जल को हम अपनी इच्छानुसार आपकी आज्ञा से क्यों न छूएँ?॥24॥   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.169.24 
अनिवार्यमसम्बाधं तव वाचा कथं वयम्।
न स्पृशेम यथाकामं पुण्यं भागीरथीजलम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जिसे कोई रोक नहीं सकता तथा जहाँ पहुँचने में कोई बाधा नहीं है, उस पवित्र भागीरथी के जल को हम अपनी इच्छानुसार आपकी आज्ञा से क्यों न छूएँ?॥24॥
 
Why should we not touch the holy water of Bhagirathi, which no one can stop and where there is no obstacle in reaching, as per our wish, at your command? ॥24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)