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mahabharat 1.169.23: यह शुभ दिव्य नदी सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्त है और स्वर्ग प्राप्ति में सहायक है। उसी गंगा पर आप प्रतिबंध क्यों लगाना चाहते हैं? यह सनातन धर्म नहीं है॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.169.23 
असम्बाधा देवनदी स्वर्गसम्पादनी शुभा।
कथमिच्छसि तां रोद्धुं नैष धर्म: सनातन:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
यह शुभ दिव्य नदी सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्त है और स्वर्ग प्राप्ति में सहायक है। उसी गंगा पर आप प्रतिबंध क्यों लगाना चाहते हैं? यह सनातन धर्म नहीं है॥ 23॥
 
This auspicious divine river is free from all kinds of obstacles and helps one to attain heaven. Why do you want to put a ban on the same Ganga? This is not Sanatan Dharma.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)