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mahabharat 1.169.2: परन्तु कुन्तीपुत्रों ने पहले ही उस ब्राह्मण से, जिसने उन्हें आश्रय दिया था, अनुमति ले ली थी और जाते समय उन्होंने उसे बड़े आदर से प्रणाम किया था। वे सब लोग उत्तर दिशा की ओर जाने वाले सीधे मार्गों से उत्तर दिशा की ओर मुख करके अपने अभीष्ट स्थान पांचाल देश की ओर चल पड़े॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.169.2 
आमन्त्र्य ब्राह्मणं पूर्वमभिवाद्यानुमान्य च।
समैरुदङ्मुखैर्मार्गैर्यथोद्दिष्टं परंतपा:॥ २॥
 
 
अनुवाद
परन्तु कुन्तीपुत्रों ने पहले ही उस ब्राह्मण से, जिसने उन्हें आश्रय दिया था, अनुमति ले ली थी और जाते समय उन्होंने उसे बड़े आदर से प्रणाम किया था। वे सब लोग उत्तर दिशा की ओर जाने वाले सीधे मार्गों से उत्तर दिशा की ओर मुख करके अपने अभीष्ट स्थान पांचाल देश की ओर चल पड़े॥ 2॥
 
But the sons of Kunti had already sought permission from the Brahmin who had given them shelter, and while leaving, they bowed to him with great respect. All of them started moving towards their desired destination Panchal Desh, facing north, through the straight paths going towards the north.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)