Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.169.19-22: प्राचीन काल में गंगा हिमालय के स्वर्ण शिखर से निकली थीं और सात धाराओं में विभक्त होकर समुद्र में विलीन हो गईं। जो लोग प्लक्ष, रथस्ता, सरयू, गोमती और गंडकी के मूल से उत्पन्न गंगा, यमुना, सरस्वती - इन सात नदियों का जल पीते हैं, उनके पाप तत्काल नष्ट हो जाते हैं। यह गंगा अत्यंत पवित्र नदी है। इसका एकमात्र तट आकाश है। गंधर्व! आकाश में भ्रमण करने वाली यह गंगा देवलोक में अलकनंदा नाम धारण करती है। यह वैतरणी है और पितृलोक में बहती है। वहाँ पापियों के लिए इसे पार करना अत्यंत कठिन है। इस लोक में आने के बाद इसका नाम गंगा है। ऐसा श्रीकृष्ण द्वैपायन व्यासजी का कथन है॥19-22॥ | mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्राचीन काल में गंगा हिमालय के स्वर्ण शिखर से निकली थीं और सात धाराओं में विभक्त होकर समुद्र में विलीन हो गईं। जो लोग प्लक्ष, रथस्ता, सरयू, गोमती और गंडकी के मूल से उत्पन्न गंगा, यमुना, सरस्वती - इन सात नदियों का जल पीते हैं, उनके पाप तत्काल नष्ट हो जाते हैं। यह गंगा अत्यंत पवित्र नदी है। इसका एकमात्र तट आकाश है। गंधर्व! आकाश में भ्रमण करने वाली यह गंगा देवलोक में अलकनंदा नाम धारण करती है। यह वैतरणी है और पितृलोक में बहती है। वहाँ पापियों के लिए इसे पार करना अत्यंत कठिन है। इस लोक में आने के बाद इसका नाम गंगा है। ऐसा श्रीकृष्ण द्वैपायन व्यासजी का कथन है॥19-22॥
In ancient times, Ganga originated from the golden peak of Himalaya and after splitting into seven streams, merged into the ocean. Those who drink the water of these seven rivers – Ganga, Yamuna, Saraswati originated from the root of Plaksha, Rathasta, Saryu, Gomti and Gandaki – their sins are destroyed instantly. This Ganga is a very holy river. Its only bank is the sky. Gandharva! This Ganga, which travels through the sky, takes the name of Alaknanda in Devlok. This is the Vaitarni and flows in Pitrlok. It is very difficult for the sinners to cross it there. After coming to this world, its name is Ganga. This is the statement of Sri Krishna Dwaipayan Vyasji.॥19-22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥