Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.169.17: हे आकाश में विचरण करने वाले गन्धर्व! सब नदियों में श्रेष्ठ गंगाजी के तट पर आने का कोई नियम नहीं है, चाहे कोई खाकर आए या बिना खाए, चाहे रात में आए या दिन में। इसी प्रकार काल आदि का भी कोई नियम नहीं है॥17॥ | mahabharat अध्याय 1.169: पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके द्वारा चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय एवं उन दोनोंकी मित्रता । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे आकाश में विचरण करने वाले गन्धर्व! सब नदियों में श्रेष्ठ गंगाजी के तट पर आने का कोई नियम नहीं है, चाहे कोई खाकर आए या बिना खाए, चाहे रात में आए या दिन में। इसी प्रकार काल आदि का भी कोई नियम नहीं है॥17॥
O Gandharva who travels in the sky! There is no rule for coming to the banks of Gangaji, the best of all rivers, whether one comes here after eating or without eating, whether one comes here at night or during the day. Similarly, there is no rule for time etc. ॥17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥