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mahabharat 1.168.2-3: उन्हें आते देख शत्रुओं का नाश करने वाले पाण्डव उनका स्वागत करने के लिए आगे आए और हाथ जोड़कर उन्हें प्रणाम करके उनके सामने खड़े हो गए। कुन्तीपुत्रों द्वारा गुप्त रूप से पूजित होकर महर्षि व्यास ने उन सबको बैठने का आदेश दिया और जब वे बैठ गए, तब प्रसन्नतापूर्वक उनसे इस प्रकार पूछा -॥2-3॥   |   mahabharat अध्याय 1.168: व्यासजीका पाण्डवोंको द्रौपदीके पूर्वजन्मका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 168: व्यासजीका पाण्डवोंको द्रौपदीके पूर्वजन्मका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  1.168.2-3 
तमागतमभिप्रेक्ष्य प्रत्युद्‍गम्य परंतपा:।
प्रणिपत्याभिवाद्यैनं तस्थु: प्राञ्जलयस्तदा॥ २॥
समनुज्ञाप्य तान् सर्वानासीनान् मुनिरब्रवीत्।
प्रच्छन्नं पूजित: पार्थै: प्रीतिपूर्वमिदं वच:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उन्हें आते देख शत्रुओं का नाश करने वाले पाण्डव उनका स्वागत करने के लिए आगे आए और हाथ जोड़कर उन्हें प्रणाम करके उनके सामने खड़े हो गए। कुन्तीपुत्रों द्वारा गुप्त रूप से पूजित होकर महर्षि व्यास ने उन सबको बैठने का आदेश दिया और जब वे बैठ गए, तब प्रसन्नतापूर्वक उनसे इस प्रकार पूछा -॥2-3॥
 
Seeing them coming, the Pandavas, the destroyers of their enemies, came forward to receive them and after saluting them with folded hands, stood before them. Being secretly worshipped by the sons of Kunti, the great sage Vyasa ordered them all to sit down and when they had sat down, he asked them happily as follows -॥2-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)