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एवमुक्त्वा महाभाग: पाण्डवान् स पितामह:।
पार्थानामन्त्र्य कुन्तीं च प्रातिष्ठत महातपा:॥ १६॥
अनुवाद
पाण्डवों से ऐसा कहकर परम सौभाग्यशाली एवं महातपस्वी पितामह व्यास उनसे तथा कुन्ती से विदा लेकर वहाँ से चले गये।
Having said this to the Pandavas, the greatly fortunate and great ascetic grandfather Vyasa took leave from them and Kunti and departed from there.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि चैत्ररथपर्वणि द्रौपदीजन्मान्तरकथने अष्टषष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १६८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत चैत्ररथपर्वमें द्रौपदीजन्मान्तरकथनविषयक एक सौ अड़सठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥