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mahabharat 1.168.10: फिर वह भगवान शिव से हितकर भाव से बोली - ‘प्रभु ! मैं सर्वगुण संपन्न पति चाहती हूँ।’ उसने यह वाक्य बार-बार दोहराया॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.168: व्यासजीका पाण्डवोंको द्रौपदीके पूर्वजन्मका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 168: व्यासजीका पाण्डवोंको द्रौपदीके पूर्वजन्मका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.168.10 
अथेश्वरमुवाचेदमात्मन: सा वचो हितम्।
पतिं सर्वगुणोपेतमिच्छामीति पुन: पुन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
फिर वह भगवान शिव से हितकर भाव से बोली - ‘प्रभु ! मैं सर्वगुण संपन्न पति चाहती हूँ।’ उसने यह वाक्य बार-बार दोहराया॥10॥
 
Then she spoke to Lord Shiva in a beneficial manner - 'Prabhu! I want a husband with all the virtues.' She repeated this sentence again and again.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)