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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 167: कुन्तीकी अपने पुत्रोंसे पूछकर पंचालदेशमें जानेकी तैयारी  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.167.6 
ते वयं साधु पञ्चालान् गच्छाम यदि मन्यसे।
अपूर्वदर्शनं वीर रमणीयं भविष्यति॥ ६॥
 
 
अनुवाद
यदि आप सहमत हों, तो अब हम आराम से पांचाल देश चलें। वीर! हमने वह देश पहले कभी नहीं देखा, इसलिए वह बहुत सुंदर लगेगा।
 
If you agree, then let us now go to Panchal country in comfort. Brave! We have never seen that country before, so it will seem very beautiful. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)