Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.167.5: वीर! यदि हम पुनः उनके दर्शन करने जाएँ, तो वे हमें उतना सुख न दे सकेंगे। कुरु नंदन! अब तो हमें यहाँ पहले जैसी भिक्षा भी नहीं मिलती।॥5॥ | mahabharat अध्याय 1.167: कुन्तीकी अपने पुत्रोंसे पूछकर पंचालदेशमें जानेकी तैयारी । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुनर्द्रष्टुं हि तानीह प्रीणयन्ति न नस्तथा।
भैक्षं च न तथा वीर लभ्यते कुरुनन्दन॥ ५॥
अनुवाद
वीर! यदि हम पुनः उनके दर्शन करने जाएँ, तो वे हमें उतना सुख न दे सकेंगे। कुरु नंदन! अब तो हमें यहाँ पहले जैसी भिक्षा भी नहीं मिलती।॥5॥
Veer! If we go to see them again, they will not be able to give us as much happiness. Kuru Nandan! Now we are not even getting alms here like before. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥