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mahabharat 1.167.10: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तब कुन्तनी ने भीमसेन, अर्जुन, नकुल और सहदेव से भी जाने के विषय में पूछा। उन सबने भी 'तथास्तु' कहकर अपनी सहमति दे दी। 10॥   |   mahabharat अध्याय 1.167: कुन्तीकी अपने पुत्रोंसे पूछकर पंचालदेशमें जानेकी तैयारी   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 167: कुन्तीकी अपने पुत्रोंसे पूछकर पंचालदेशमें जानेकी तैयारी  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.167.10 
वैशम्पायन उवाच
तत: कुन्ती भीमसेनमर्जुनं यमजौ तथा।
उवाच गमनं ते च तथेत्येवाब्रुवंस्तदा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तब कुन्तनी ने भीमसेन, अर्जुन, नकुल और सहदेव से भी जाने के विषय में पूछा। उन सबने भी 'तथास्तु' कहकर अपनी सहमति दे दी। 10॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! Then Kuntani also asked Bhimsen, Arjun, Nakul and Sahadeva about going. All of them also agreed by saying 'Amen'. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)