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वैशम्पायन उवाच
तत: कुन्ती भीमसेनमर्जुनं यमजौ तथा।
उवाच गमनं ते च तथेत्येवाब्रुवंस्तदा॥ १०॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तब कुन्तनी ने भीमसेन, अर्जुन, नकुल और सहदेव से भी जाने के विषय में पूछा। उन सबने भी 'तथास्तु' कहकर अपनी सहमति दे दी। 10॥
Vaishampayanji says – Janamejaya! Then Kuntani also asked Bhimsen, Arjun, Nakul and Sahadeva about going. All of them also agreed by saying 'Amen'. 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥