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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 166: द्रुपदके यज्ञसे धृष्टद्युम्न और द्रौपदीकी उत्पत्ति  »  श्लोक d39h
 
 
श्लोक  1.166.d39h 
वैशम्पायन उवाच
एतावदुक्त्वा वचनं ब्राह्मणो विरराम ह।)
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन जी कहते हैं - ऐसा कहकर ब्राह्मण चुप हो गया।
 
Vaishmpayana ji says – Having said this the Brahmin became quiet.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि चैत्ररथपर्वणि द्रौपदीसम्भवे षट्षष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १६६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत चैत्ररथपर्वमें द्रौपदीप्रादुर्भावविषयक एक सौ छाछठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६६॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३८ श्लोक मिलाकर कुल ९४ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)