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mahabharat 1.166.d30-d38: पधारे हुए ब्राह्मण कहते हैं—पुजारी के वचन सुनकर पांचालराज बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने नगर में द्रौपदी के स्वयंवर की घोषणा कर दी। वह स्वयंवर पौष मास के शुक्ल पक्ष की रोहिणी नक्षत्र में शुभ तिथि (एकादशी) को होगा, जिसके लिए आज से पचहत्तर दिन शेष हैं। ब्राह्मणी (कुंती)! देवता, गंधर्व, यक्ष और तपस्वी ऋषिगण भी स्वयंवर देखने अवश्य जाते हैं। आपके सभी श्रेष्ठ पुत्र देखने में अत्यंत सुंदर हैं। पांचालपुत्री कृष्ण उनमें से किसी को भी अपना पति चुन सकती हैं अथवा आपके मझले पुत्र को अपना पति बना सकती हैं। सृष्टि में विधाता के श्रेष्ठ विधान को कौन जान सकता है? इसलिए, यदि आपको मेरी बात अच्छी लगे, तो आप अपने पुत्रों के साथ पांचालदेश अवश्य जाएँ। तपस्या! पांचालदेश में सदैव उत्तम भोजन मिलता है। राजा यज्ञसेन सत्यवादी और ब्राह्मणभक्त हैं। वहाँ के नागरिक भी ब्राह्मणों के प्रति आदर और भक्ति रखते हैं। उस नगर के ब्राह्मण भी अतिथि-सत्कार के बड़े शौकीन हैं। वे बिना पूछे ही प्रतिदिन अतिथियों को आमंत्रित करेंगे। मैं भी अपने इन शिष्यों के साथ वहाँ जाऊँगा। ब्राह्मणी! अगर ठीक लगे, तो चलो। हम सब साथ-साथ चलेंगे।   |   mahabharat अध्याय 1.166: द्रुपदके यज्ञसे धृष्टद्युम्न और द्रौपदीकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 166: द्रुपदके यज्ञसे धृष्टद्युम्न और द्रौपदीकी उत्पत्ति  »  श्लोक d30-d38
 
 
श्लोक  1.166.d30-d38 
ब्राह्मण उवाच
श्रुत्वा पुरोहितेनोक्तं पाञ्चाल: प्रीतिमांस्तदा।
घोषयामास नगरे द्रौपद्यास्तु स्वयंवरम्॥
पुष्यमासे तु रोहिण्यां शुक्लपक्षे शुभे तिथौ।
दिवसै: पञ्चसप्तत्या भविष्यति स्वयंवर:॥
देवगन्धर्वयक्षाश्च ऋषयश्च तपोधना:।
स्वयंवरं द्रष्टुकामा गच्छन्त्येव न संशय:॥
तव पुत्रा महात्मानो दर्शनीया विशेषत:।
यदृच्छया तु पाञ्चाली गच्छेद् वा मध्यमं पतिम्॥
को हि जानाति लोकेषु प्रजापतिविधिं परम्।
तस्मात् सपुत्रा गच्छेथा ब्राह्मण्यै यदि रोचते॥
नित्यकालं सुभिक्षास्ते पञ्चालास्तु तपोधने॥
यज्ञसेनस्तु राजासौ ब्रह्मण्य: सत्यसङ्गर:।
ब्रह्मण्या नागराश्चाथ ब्राह्मणाश्चातिथिप्रिया:॥
नित्यकालं प्रदास्यन्ति आमन्त्रणमयाचितम्॥
अहं च तत्र गच्छामि ममैभि: सह शिष्यकै:।
एकसार्था: प्रयाता: स्मो ब्राह्मण्यै यदि रोचते॥
 
 
अनुवाद
पधारे हुए ब्राह्मण कहते हैं—पुजारी के वचन सुनकर पांचालराज बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने नगर में द्रौपदी के स्वयंवर की घोषणा कर दी। वह स्वयंवर पौष मास के शुक्ल पक्ष की रोहिणी नक्षत्र में शुभ तिथि (एकादशी) को होगा, जिसके लिए आज से पचहत्तर दिन शेष हैं। ब्राह्मणी (कुंती)! देवता, गंधर्व, यक्ष और तपस्वी ऋषिगण भी स्वयंवर देखने अवश्य जाते हैं। आपके सभी श्रेष्ठ पुत्र देखने में अत्यंत सुंदर हैं। पांचालपुत्री कृष्ण उनमें से किसी को भी अपना पति चुन सकती हैं अथवा आपके मझले पुत्र को अपना पति बना सकती हैं। सृष्टि में विधाता के श्रेष्ठ विधान को कौन जान सकता है? इसलिए, यदि आपको मेरी बात अच्छी लगे, तो आप अपने पुत्रों के साथ पांचालदेश अवश्य जाएँ। तपस्या! पांचालदेश में सदैव उत्तम भोजन मिलता है। राजा यज्ञसेन सत्यवादी और ब्राह्मणभक्त हैं। वहाँ के नागरिक भी ब्राह्मणों के प्रति आदर और भक्ति रखते हैं। उस नगर के ब्राह्मण भी अतिथि-सत्कार के बड़े शौकीन हैं। वे बिना पूछे ही प्रतिदिन अतिथियों को आमंत्रित करेंगे। मैं भी अपने इन शिष्यों के साथ वहाँ जाऊँगा। ब्राह्मणी! अगर ठीक लगे, तो चलो। हम सब साथ-साथ चलेंगे।
 
The visiting Brahmin says—The king of Panchala was very happy to hear the priest's words. He announced Draupadi's swayamvar in the city. That swayamvar will take place on the auspicious date (Ekadashi) in the bright half of Paush month in the Rohini constellation, for which seventy-five days are left from today. Brahmini (Kunti)! Gods, Gandharvas, Yakshas and ascetic sages also definitely go to see the swayamvar. All your great sons are extremely beautiful to look at. Krishna, daughter of Panchala, can choose any of them as her husband or can make your middle son her husband. Who in the world can know the best law of the Creator? Therefore, if you like my words, then you must go to Panchala Desh with your sons. Tapasya! There is always good food in Panchala Desh. King Yajnasen is truthful and a devotee of Brahmins. The citizens there also have respect and devotion towards Brahmins. The Brahmins of that city are also very fond of guests. They will invite guests every day without being asked. I will also go there with these disciples of mine. Brahmini! If it seems right, then let's go. We will all go there together.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)