Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.166.50: आकाश से आती हुई उस वाणी को सुनकर समस्त पांचाल सिंहों के समूह के समान गर्जना करने लगे। उस समय हर्ष में भरे हुए उन पांचालों का वेग पृथ्वी सहन न कर सकी ॥50॥ | mahabharat अध्याय 1.166: द्रुपदके यज्ञसे धृष्टद्युम्न और द्रौपदीकी उत्पत्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तच्छ्रुत्वा सर्वपाञ्चाला: प्रणेदु: सिंहसङ्घवत्।
न चैतान् हर्षसम्पूर्णानियं सेहे वसुंधरा॥ ५०॥
अनुवाद
आकाश से आती हुई उस वाणी को सुनकर समस्त पांचाल सिंहों के समूह के समान गर्जना करने लगे। उस समय हर्ष में भरे हुए उन पांचालों का वेग पृथ्वी सहन न कर सकी ॥50॥
On hearing that voice from the sky, all the Panchalas began to roar like a herd of lions. At that time the earth could not bear the speed of those Panchalas who were filled with joy. ॥ 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥