Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.166.42-43: उस समय हर्ष और प्रसन्नता से परिपूर्ण इन पांचालों का भार पृथ्वी सहन न कर सकी । आकाश में कोई अदृश्य महाभूत इस प्रकार कहने लगा - 'यह राजकुमार पांचालों का भय दूर करेगा और उनकी कीर्ति बढ़ाएगा । यह राजा द्रुपद का शोक दूर करेगा । इसका जन्म द्रोणाचार्य का वध करने के लिए ही हुआ है ।' ॥42-43॥ | mahabharat अध्याय 1.166: द्रुपदके यज्ञसे धृष्टद्युम्न और द्रौपदीकी उत्पत्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय हर्ष और प्रसन्नता से परिपूर्ण इन पांचालों का भार पृथ्वी सहन न कर सकी । आकाश में कोई अदृश्य महाभूत इस प्रकार कहने लगा - 'यह राजकुमार पांचालों का भय दूर करेगा और उनकी कीर्ति बढ़ाएगा । यह राजा द्रुपद का शोक दूर करेगा । इसका जन्म द्रोणाचार्य का वध करने के लिए ही हुआ है ।' ॥42-43॥
At that time, the earth could not bear the weight of these Panchalas who were filled with joy and happiness. Some invisible Mahabhoot in the sky started saying thus - 'This prince will remove the fear of the Panchalas and will increase their fame. He will remove the grief of King Drupada. He has been born only to kill Dronacharya'. ॥ 42-43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥