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mahabharat 1.166.36-d1h: हवन के अन्त में पुरोहित ने द्रुपद की रानी को आज्ञा दी, "पृषट की पुत्रवधू! रानी! हवन का प्रसाद ग्रहण करने के लिए शीघ्र ही मेरे पास आओ। तुम्हें एक पुत्र और एक पुत्री की प्राप्ति होगी। वे अपने पिता के कुल की कीर्ति बढ़ाएँगे।" ॥36॥   |   mahabharat अध्याय 1.166: द्रुपदके यज्ञसे धृष्टद्युम्न और द्रौपदीकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 166: द्रुपदके यज्ञसे धृष्टद्युम्न और द्रौपदीकी उत्पत्ति  »  श्लोक 36-d1h
 
 
श्लोक  1.166.36-d1h 
याजस्तु हवनस्यान्ते देवीमाज्ञापयत् तदा।
प्रेहि मां राज्ञि पृषति मिथुनं त्वामुपस्थितम्॥ ३६॥
(कुमारश्च कुमारी च पितृवंशविवृद्धये।)
 
 
अनुवाद
हवन के अन्त में पुरोहित ने द्रुपद की रानी को आज्ञा दी, "पृषट की पुत्रवधू! रानी! हवन का प्रसाद ग्रहण करने के लिए शीघ्र ही मेरे पास आओ। तुम्हें एक पुत्र और एक पुत्री की प्राप्ति होगी। वे अपने पिता के कुल की कीर्ति बढ़ाएँगे।" ॥36॥
 
At the end of the havan, the priest commanded the queen of Drupada, "Daughter-in-law of Prishat! Queen! Come to me soon to receive the havan. You are going to have a son and a daughter. They will increase the glory of their father's family." ॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)