Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.166.32-33: यह बहुत बड़ा कार्य है, ऐसा सोचकर यज्ञ ने उपयाज को, जिनकी इस कार्य में कोई अन्य इच्छा नहीं थी, ऐसा करने के लिए प्रेरित किया। यज्ञ ने द्रोण का नाश करने के लिए ऐसे पुत्र को उत्पन्न करने की प्रतिज्ञा की। इसके बाद महातपस्वी उपयाज ने राजा द्रुपद को पुत्र प्राप्ति के लिए आवश्यक यज्ञों का उपदेश दिया ॥ 32-33॥ | mahabharat अध्याय 1.166: द्रुपदके यज्ञसे धृष्टद्युम्न और द्रौपदीकी उत्पत्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यह बहुत बड़ा कार्य है, ऐसा सोचकर यज्ञ ने उपयाज को, जिनकी इस कार्य में कोई अन्य इच्छा नहीं थी, ऐसा करने के लिए प्रेरित किया। यज्ञ ने द्रोण का नाश करने के लिए ऐसे पुत्र को उत्पन्न करने की प्रतिज्ञा की। इसके बाद महातपस्वी उपयाज ने राजा द्रुपद को पुत्र प्राप्ति के लिए आवश्यक यज्ञों का उपदेश दिया ॥ 32-33॥
Thinking that this is a very big task, Yajna motivated Upayaja, who had no other desire for this task, to do so. Yajna took a vow to produce such a son to destroy Drona. After this, the great ascetic Upayaja preached to King Drupada the necessary yagnas to achieve the desired result of a son. ॥ 32-33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥