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mahabharat 1.166.3: वे पश्चाताप के कारण पहले से उत्पन्न पुत्रों और भाइयों को शाप देते थे। राजा द्रुपद द्रोण से बदला लेने की इच्छा से सदैव गहरी साँसें लेते रहते थे।   |   mahabharat अध्याय 1.166: द्रुपदके यज्ञसे धृष्टद्युम्न और द्रौपदीकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 166: द्रुपदके यज्ञसे धृष्टद्युम्न और द्रौपदीकी उत्पत्ति  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.166.3 
जातान् पुत्रान् स निर्वेदाद् धिग् बन्धूनिति चाब्रवीत्।
नि:श्वासपरमश्चासीद् द्रोणं प्रतिचिकीर्षया॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वे पश्चाताप के कारण पहले से उत्पन्न पुत्रों और भाइयों को शाप देते थे। राजा द्रुपद द्रोण से बदला लेने की इच्छा से सदैव गहरी साँसें लेते रहते थे।
 
He used to curse the sons and brothers who were already born out of regret. King Drupada used to take deep breaths always with the desire to take revenge on Drona.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)