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mahabharat 1.166.25-26: द्रोणाचार्य के बाणों का समूह प्राणियों के शरीरों को नष्ट करने में समर्थ है। उनका छः हाथ का धनुष अत्यन्त विशाल प्रतीत होता है। इसमें सन्देह नहीं कि महान् धनुर्धर महामना द्रोण ब्राह्मण वेश में (अपने ब्राह्मणत्व से) क्षत्रिय के तेज का प्रतिकार करते हैं।॥ 25-26॥   |   mahabharat अध्याय 1.166: द्रुपदके यज्ञसे धृष्टद्युम्न और द्रौपदीकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 166: द्रुपदके यज्ञसे धृष्टद्युम्न और द्रौपदीकी उत्पत्ति  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  1.166.25-26 
द्रोणस्य शरजालानि प्राणिदेहहराणि च।
षडरत्नि धनुश्चास्य दृश्यते परमं महत्॥ २५॥
स हि ब्राह्मणवेषेण क्षात्रं वेगमसंशयम्।
प्रतिहन्ति महेष्वासो भारद्वाजो महामना:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य के बाणों का समूह प्राणियों के शरीरों को नष्ट करने में समर्थ है। उनका छः हाथ का धनुष अत्यन्त विशाल प्रतीत होता है। इसमें सन्देह नहीं कि महान् धनुर्धर महामना द्रोण ब्राह्मण वेश में (अपने ब्राह्मणत्व से) क्षत्रिय के तेज का प्रतिकार करते हैं।॥ 25-26॥
 
‘Dronacharya's group of arrows are capable of destroying the bodies of living beings. His six-hand long bow looks very big. There is no doubt that the great archer Mahamana Drona, in the guise of a Brahmin, (by his brahminical power) counters the brilliance of a Kshatriya.॥ 25-26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)