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mahabharat 1.166.22: 'प्रभो! मैं आपको अस्सी हज़ार गौएँ अर्पित करता हूँ। कृपया मेरा यज्ञ सम्पन्न कीजिए। मैं द्रोण के शत्रुता से दुःखी हूँ। कृपया मुझे प्रसन्न कीजिए।॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 1.166: द्रुपदके यज्ञसे धृष्टद्युम्न और द्रौपदीकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 166: द्रुपदके यज्ञसे धृष्टद्युम्न और द्रौपदीकी उत्पत्ति  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.166.22 
अयुतानि ददान्यष्टौ गवां याजय मां विभो।
द्रोणवैराभिसंतप्तं प्रह्लादयितुमर्हसि॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'प्रभो! मैं आपको अस्सी हज़ार गौएँ अर्पित करता हूँ। कृपया मेरा यज्ञ सम्पन्न कीजिए। मैं द्रोण के शत्रुता से दुःखी हूँ। कृपया मुझे प्रसन्न कीजिए।॥ 22॥
 
'Lord! I offer you eighty thousand cows. Please perform my yagya. I am distressed by Drona's enmity. Please make me happy.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)