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mahabharat 1.166.2: वह अपने लिए एक अच्छा पुत्र चाहता था। उसका मन सदैव शोक से व्याकुल रहता था। वह दिन-रात इसी चिंता में रहता था कि उसका कोई अच्छा पुत्र नहीं है॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 1.166: द्रुपदके यज्ञसे धृष्टद्युम्न और द्रौपदीकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 166: द्रुपदके यज्ञसे धृष्टद्युम्न और द्रौपदीकी उत्पत्ति  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.166.2 
पुत्रजन्म परीप्सन् वै शोकोपहतचेतन:।
नास्ति श्रेष्ठमपत्यं मे इति नित्यमचिन्तयत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
वह अपने लिए एक अच्छा पुत्र चाहता था। उसका मन सदैव शोक से व्याकुल रहता था। वह दिन-रात इसी चिंता में रहता था कि उसका कोई अच्छा पुत्र नहीं है॥ 2॥
 
He wanted a good son for himself. His mind was always troubled with grief. Day and night he used to worry that he did not have any good son.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)