Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.166.14-15: तदनन्तर एक वर्ष बीत जाने पर श्रेष्ठ ब्राह्मण उपयाज ने उचित अवसर पर मधुर वाणी में द्रुपद से कहा - 'हे राजन! एक समय मेरे बड़े भाई याज घने वन में विचरण कर रहे थे। उन्होंने भूमि पर गिरा हुआ एक फल उठा लिया, जिसकी शुद्धता के विषय में कुछ भी ज्ञात नहीं था।॥ 14-15॥ | mahabharat अध्याय 1.166: द्रुपदके यज्ञसे धृष्टद्युम्न और द्रौपदीकी उत्पत्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तदनन्तर एक वर्ष बीत जाने पर श्रेष्ठ ब्राह्मण उपयाज ने उचित अवसर पर मधुर वाणी में द्रुपद से कहा - 'हे राजन! एक समय मेरे बड़े भाई याज घने वन में विचरण कर रहे थे। उन्होंने भूमि पर गिरा हुआ एक फल उठा लिया, जिसकी शुद्धता के विषय में कुछ भी ज्ञात नहीं था।॥ 14-15॥
Thereafter, after one year had passed, the best Brahmin Upayaj said to Drupada in a sweet voice on an appropriate occasion - 'O King! Once my elder brother Yaaj was wandering in a dense forest. He picked up a fruit that had fallen on the ground, about the purity of which nothing was known.॥ 14-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥