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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 165: द्रोणके द्वारा द्रुपदके अपमानित होनेका वृत्तान्त  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.165.7 
स नित्यमाश्रमं गत्वा द्रोणेन सह पार्षत:।
चिक्रीडाध्ययनं चैव चकार क्षत्रियर्षभ:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
महान क्षत्रिय राजकुमार द्रुपद प्रतिदिन ऋषि भारद्वाज के आश्रम में आते थे और द्रोण के साथ खेलते और अध्ययन करते थे।
 
The great Kshatriya prince Drupada used to visit the hermitage of sage Bharadwaj every day and play and study with Drona.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)