Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.165.28: उस समय जो महान अपमान हुआ था, वह राजा द्रुपद के हृदय से दो क्षण के लिए भी न जा सका। वे हृदय में अत्यंत दुःखी हुए और उनका शरीर भी अत्यंत दुर्बल हो गया॥ 28॥ | mahabharat अध्याय 1.165: द्रोणके द्वारा द्रुपदके अपमानित होनेका वृत्तान्त । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
असत्कार: स तु महान् मुहूर्तमपि तस्य तु।
नापैति हृदयाद् राज्ञो दुर्मना: स कृशोऽभवत्॥ २८॥
अनुवाद
उस समय जो महान अपमान हुआ था, वह राजा द्रुपद के हृदय से दो क्षण के लिए भी न जा सका। वे हृदय में अत्यंत दुःखी हुए और उनका शरीर भी अत्यंत दुर्बल हो गया॥ 28॥
The great insult that he had suffered at that time could not leave King Drupada's heart for even two moments. He was very sad in his heart and his body also became very weak.॥ 28॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि चैत्ररथपर्वणि द्रौपदीसम्भवे पञ्चषष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १६५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत चैत्ररथपर्वमें द्रौपदीजन्मविषयक एक सौ पैंसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६५॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ श्लोक मिलाकर कुल ३२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥