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mahabharat 1.165.25: भ्रमणशील ब्राह्मण कहते हैं - बुद्धिमान भरद्वाजनंदन द्रोण के मुख से ऐसा सुनकर शस्त्रविद्या में श्रेष्ठ पांचालराज द्रुपद ने भयंकर द्रोण से इस प्रकार कहा - ॥25॥   |   mahabharat अध्याय 1.165: द्रोणके द्वारा द्रुपदके अपमानित होनेका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 165: द्रोणके द्वारा द्रुपदके अपमानित होनेका वृत्तान्त  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.165.25 
ब्राह्मण उवाच
एवमुक्तो हि पाञ्चाल्यो भारद्वाजेन धीमता।
उवाचास्त्रविदां श्रेष्ठो द्रोणं ब्राह्मणसत्तमम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
भ्रमणशील ब्राह्मण कहते हैं - बुद्धिमान भरद्वाजनंदन द्रोण के मुख से ऐसा सुनकर शस्त्रविद्या में श्रेष्ठ पांचालराज द्रुपद ने भयंकर द्रोण से इस प्रकार कहा - ॥25॥
 
The visiting Brahmin says - On hearing this from the wise Bhardwajnandan Drona, the Panchala king Drupada, the best among weapons experts, said to the fierce Drona thus - ॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)