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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 165: द्रोणके द्वारा द्रुपदके अपमानित होनेका वृत्तान्त  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.165.2 
सोऽभिषेक्तुं गतो गङ्गां पूर्वमेवागतां सतीम्।
ददर्शाप्सरसं तत्र घृताचीमाप्लुतामृषि:॥ २॥
 
 
अनुवाद
एक दिन वे गंगा स्नान के लिए गए। घृताची नाम की एक सुंदर अप्सरा वहाँ पहले से ही आ चुकी थी और गंगा में डुबकी लगा रही थी। ऋषि ने उसे देख लिया।
 
One day he went to take a bath in the Ganges. A beautiful Apsara named Ghritachi had already come there and was taking a dip in the Ganges. The sage saw her.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)