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mahabharat 1.165.18: तब द्रोण ने कुन्तीपुत्रों आदि सहित अपने समस्त शिष्यों को एकत्र किया और द्रुपद को कष्ट देने के उद्देश्य से यह कहा- ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.165: द्रोणके द्वारा द्रुपदके अपमानित होनेका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 165: द्रोणके द्वारा द्रुपदके अपमानित होनेका वृत्तान्त  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.165.18 
द्रोण: शिष्यांस्तत: पार्थानिदं वचनमब्रवीत्।
समानीय तु ताञ्शिष्यान् द्रुपदस्यासुखाय वै॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तब द्रोण ने कुन्तीपुत्रों आदि सहित अपने समस्त शिष्यों को एकत्र किया और द्रुपद को कष्ट देने के उद्देश्य से यह कहा- ॥18॥
 
Then Drona called together all his disciples, including Kunti's sons and others, and with the intention of troubling Drupada said the following: ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)