Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.165.15: द्रुपद बोले, "जो श्रोत्रिय नहीं है, वह श्रोत्रिय का मित्र होने के योग्य नहीं है; जो सारथी नहीं है, वह वीर सारथी का मित्र होने के योग्य नहीं है; और जो राजा नहीं है, वह किसी राजा का मित्र होने के योग्य नहीं है; फिर तुम पहले वाले की मित्रता क्यों चाहते हो?" | mahabharat अध्याय 1.165: द्रोणके द्वारा द्रुपदके अपमानित होनेका वृत्तान्त । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रुपद बोले, "जो श्रोत्रिय नहीं है, वह श्रोत्रिय का मित्र होने के योग्य नहीं है; जो सारथी नहीं है, वह वीर सारथी का मित्र होने के योग्य नहीं है; और जो राजा नहीं है, वह किसी राजा का मित्र होने के योग्य नहीं है; फिर तुम पहले वाले की मित्रता क्यों चाहते हो?"
Drupada said, "He who is not a Shrotriya is not fit to be a friend of a Shrotriya; he who is not a charioteer is not fit to be a friend of a brave charioteer; and he who is not a king is not fit to be a friend of any king; then why do you desire the friendship of the former?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥