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mahabharat 1.165.10: परशुरामजी बोले - हे ब्रह्मन्! अब तो मैंने केवल अपना शरीर ही बचा लिया है (शरीर को छोड़कर सब कुछ दान कर दिया है)। अतः अब तुम या तो मेरे अस्त्र-शस्त्र मांग लो या यह शरीर मांग लो॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.165: द्रोणके द्वारा द्रुपदके अपमानित होनेका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 165: द्रोणके द्वारा द्रुपदके अपमानित होनेका वृत्तान्त  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.165.10 
राम उवाच
शरीरमात्रमेवाद्य मया समवशेषितम्।
अस्त्राणि वा शरीरं वा ब्रह्मन्नेकतमं वृणु॥ १०॥
 
 
अनुवाद
परशुरामजी बोले - हे ब्रह्मन्! अब तो मैंने केवल अपना शरीर ही बचा लिया है (शरीर को छोड़कर सब कुछ दान कर दिया है)। अतः अब तुम या तो मेरे अस्त्र-शस्त्र मांग लो या यह शरीर मांग लो॥10॥
 
Parshuram said - O Brahman! Now I have only saved my body (I have donated everything except my body). So now you can ask for either my weapons or this body.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)