Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.164.4: उस ब्राह्मण का व्रत था कि वह अपने घर आए हुए सभी अतिथियों की सदैव सेवा करेगा। उसने अतिथि ब्राह्मण का खूब पूजन किया और उसे रहने के लिए स्थान दिया ॥4॥ | mahabharat अध्याय 1.164: पाण्डवोंका एक ब्राह्मणसे विचित्र कथाएँ सुनना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स सम्यक् पूजयित्वा तं विप्रं विप्रर्षभस्तदा।
ददौ प्रतिश्रयं तस्मै सदा सर्वातिथिव्रत:॥ ४॥
अनुवाद
उस ब्राह्मण का व्रत था कि वह अपने घर आए हुए सभी अतिथियों की सदैव सेवा करेगा। उसने अतिथि ब्राह्मण का खूब पूजन किया और उसे रहने के लिए स्थान दिया ॥4॥
That Brahmin had a vow to always serve all the guests who came to his house. He worshipped the visiting Brahmin very well and gave him a place to stay. ॥4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥