Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.164.12: वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! जब पुरुषमुख पाण्डवों ने ऐसा पूछा, तब आगन्तुक ब्राह्मण ने द्रौपदी की उत्पत्ति का सम्पूर्ण वृत्तान्त सुनाना आरम्भ किया॥12॥ | mahabharat अध्याय 1.164: पाण्डवोंका एक ब्राह्मणसे विचित्र कथाएँ सुनना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
एवं तैश्चोदितो राजन् स विप्र: पुरुषर्षभै:।
कथयामास तत् सर्वं द्रौपदीसम्भवं तदा॥ १२॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! जब पुरुषमुख पाण्डवों ने ऐसा पूछा, तब आगन्तुक ब्राह्मण ने द्रौपदी की उत्पत्ति का सम्पूर्ण वृत्तान्त सुनाना आरम्भ किया॥12॥
Vaishampayanji says- Rajan! When the male-headed Pandavas asked this, the visiting Brahmin started narrating the entire story of Draupadi's origin. 12॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि चैत्ररथपर्वणि द्रौपदीसम्भवे चतु:षष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १६४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत चैत्ररथपर्वमें ब्राह्मणकथाविषयक एक सौ चौंसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥