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mahabharat 1.163.18: ‘ब्रह्मन्! आज मैं स्वयं उस दुष्टबुद्धि राक्षस को भोजन कराऊँगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘मेरे लिए तुम्हें भय नहीं होना चाहिए।’ ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.163: बकासुरके वधसे राक्षसोंका भयभीत होकर पलायन और नगरनिवासियोंकी प्रसन्नता   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 163: बकासुरके वधसे राक्षसोंका भयभीत होकर पलायन और नगरनिवासियोंकी प्रसन्नता  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.163.18 
प्रापयिष्याम्यहं तस्मा अन्नमेतद् दुरात्मने।
मन्निमित्तं भयं चापि न कार्यमिति चाब्रवीत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
‘ब्रह्मन्! आज मैं स्वयं उस दुष्टबुद्धि राक्षस को भोजन कराऊँगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘मेरे लिए तुम्हें भय नहीं होना चाहिए।’ ॥18॥
 
'Brahman! Today I myself will take food to that evil-minded demon.' He also told that 'You should not be afraid for me.' ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)