Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.162.d1-5: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! इस प्रकार ब्राह्मण (रक्षा) के हित में युधिष्ठिर से परामर्श करके कुन्तीदेवी ने भीतर जाकर सम्पूर्ण ब्राह्मण परिवार को सान्त्वना दी। तत्पश्चात, जब रात्रि बीत गई, तब पाण्डुनन्दन भीमसेन भोजन सामग्री लेकर उस स्थान पर गए जहाँ वह नरभक्षी राक्षस रहता था। राक्षस के वन में पहुँचकर महाबली पाण्डुकुमार भीमसेन स्वयं उसके लिए लाए गए भोजन को खाते हुए उस राक्षस को उसके नाम से पुकारने लगे।   |   mahabharat अध्याय 1.162: भीमसेनका भोजन-सामग्री लेकर बकासुरके पास जाना और स्वयं भोजन करना तथा युद्ध करके उसे मार गिराना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 162: भीमसेनका भोजन-सामग्री लेकर बकासुरके पास जाना और स्वयं भोजन करना तथा युद्ध करके उसे मार गिराना  »  श्लोक d1-5
 
 
श्लोक  1.162.d1-5 
वैशम्पायन उवाच
(युधिष्ठिरेण सम्मन्त्र्य ब्राह्मणार्थमरिंदम।
कुन्ती प्रविश्य तान् सर्वान् सान्त्वयामास भारत॥ )
ततो रात्र्यां व्यतीतायामन्नमादाय पाण्डव:।
भीमसेनो ययौ तत्र यत्रासौ पुरुषादक:॥ ४॥
आसाद्य तु वनं तस्य रक्षस: पाण्डवो बली।
आजुहाव ततो नाम्ना तदन्नमुपपादयन्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! इस प्रकार ब्राह्मण (रक्षा) के हित में युधिष्ठिर से परामर्श करके कुन्तीदेवी ने भीतर जाकर सम्पूर्ण ब्राह्मण परिवार को सान्त्वना दी। तत्पश्चात, जब रात्रि बीत गई, तब पाण्डुनन्दन भीमसेन भोजन सामग्री लेकर उस स्थान पर गए जहाँ वह नरभक्षी राक्षस रहता था। राक्षस के वन में पहुँचकर महाबली पाण्डुकुमार भीमसेन स्वयं उसके लिए लाए गए भोजन को खाते हुए उस राक्षस को उसके नाम से पुकारने लगे।
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! After consulting Yudhishthira in this way for the sake of Brahmin (protection), Kuntidevi went inside and consoled the entire Brahmin family. After that, when the night passed, Pandunandan Bhimsen went with food items to the place where that man-eating demon lived. After reaching the forest of the demon, the mighty Pandukumar Bhimsen himself started calling the demon by his name while eating the food brought for him. 4-5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)