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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 162: भीमसेनका भोजन-सामग्री लेकर बकासुरके पास जाना और स्वयं भोजन करना तथा युद्ध करके उसे मार गिराना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.162.11 
भीमसेनस्तत: श्रुत्वा प्रहसन्निव भारत।
राक्षसं तमनादृत्य भुङ्‍‍क्त एव पराङ्मुख:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उसके शब्द सुनकर भीमसेन जोर-जोर से हंसने लगे और राक्षस की परवाह न करते हुए अपना मुख फेर लिया और खाना जारी रखा।
 
On hearing his words, Bhimasena began to laugh loudly and, disregarding the demon, turned his face away and continued eating.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)