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mahabharat 1.161.6: तुम दूसरे के पुत्र के लिए अपने पुत्र को क्यों त्यागना चाहते हो? अपने पुत्र को त्यागकर तुमने संसार के नियमों और वेदों, दोनों के विरुद्ध कार्य किया है।   |   mahabharat अध्याय 1.161: भीमसेनको राक्षसके पास भेजनेके विषयमें युधिष्ठिर और कुन्तीकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 161: भीमसेनको राक्षसके पास भेजनेके विषयमें युधिष्ठिर और कुन्तीकी बातचीत  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.161.6 
कथं परसुतस्यार्थे स्वसुतं त्यक्तुमिच्छसि।
लोकवेदविरुद्धं हि पुत्रत्यागात् कृतं त्वया॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तुम दूसरे के पुत्र के लिए अपने पुत्र को क्यों त्यागना चाहते हो? अपने पुत्र को त्यागकर तुमने संसार के नियमों और वेदों, दोनों के विरुद्ध कार्य किया है।
 
Why do you want to give up your son for someone else's son? By giving up your son you have acted against both the rules of the world and the Vedas. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)