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mahabharat 1.161.5: युधिष्ठिर बोले, "माता! आपने यह असह्य एवं कठिन कदम क्यों उठाया? धर्मात्मा पुरुष अपने पुत्र का परित्याग करना अच्छा नहीं समझता।" ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.161: भीमसेनको राक्षसके पास भेजनेके विषयमें युधिष्ठिर और कुन्तीकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 161: भीमसेनको राक्षसके पास भेजनेके विषयमें युधिष्ठिर और कुन्तीकी बातचीत  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.161.5 
युधिष्ठिर उवाच
किमिदं साहसं तीक्ष्णं भवत्या दुष्करं कृतम्।
परित्यागं हि पुत्रस्य न प्रशंसन्ति साधव:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "माता! आपने यह असह्य एवं कठिन कदम क्यों उठाया? धर्मात्मा पुरुष अपने पुत्र का परित्याग करना अच्छा नहीं समझता।" ॥5॥
 
Yudhishthira said, "Mother! Why did you take this unbearable and difficult step? A virtuous man does not consider abandoning his son as good." ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)