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mahabharat 1.161.4: कुन्ती बोली, 'बेटा! शत्रुओं को पीड़ा देने वाले भीमसेन आज मेरी आज्ञा से ब्राह्मणों के हित के लिए तथा सम्पूर्ण नगर को संकट से मुक्त करने के लिए एक महान कार्य करेंगे।'   |   mahabharat अध्याय 1.161: भीमसेनको राक्षसके पास भेजनेके विषयमें युधिष्ठिर और कुन्तीकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 161: भीमसेनको राक्षसके पास भेजनेके विषयमें युधिष्ठिर और कुन्तीकी बातचीत  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.161.4 
कुन्त्युवाच
ममैव वचनादेष करिष्यति परंतप:।
ब्राह्मणार्थे महत् कृत्यं मोक्षाय नगरस्य च॥ ४॥
 
 
अनुवाद
कुन्ती बोली, 'बेटा! शत्रुओं को पीड़ा देने वाले भीमसेन आज मेरी आज्ञा से ब्राह्मणों के हित के लिए तथा सम्पूर्ण नगर को संकट से मुक्त करने के लिए एक महान कार्य करेंगे।'
 
Kunti said, 'Son! Bhimasena, the tormentor of enemies, will, by my order, perform a great deed today for the benefit of the Brahmin and to free the entire city from danger.' 4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)