Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.161.26: हे पौरवकुल को आनन्द प्रदान करने वाले युधिष्ठिर! पूर्वकाल में दुर्लभ बुद्धि और विवेक से युक्त भगवान व्यास ने मुझसे ऐसा कहा था; इसलिए मैंने ऐसा प्रयत्न किया है॥ 26॥ | mahabharat अध्याय 1.161: भीमसेनको राक्षसके पास भेजनेके विषयमें युधिष्ठिर और कुन्तीकी बातचीत । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं मां भगवान् व्यास: पुरा पौरवनन्दन।
प्रोवाचासुकरप्रज्ञस्तस्मादेवं चिकीर्षितम्॥ २६॥
अनुवाद
हे पौरवकुल को आनन्द प्रदान करने वाले युधिष्ठिर! पूर्वकाल में दुर्लभ बुद्धि और विवेक से युक्त भगवान व्यास ने मुझसे ऐसा कहा था; इसलिए मैंने ऐसा प्रयत्न किया है॥ 26॥
O Yudhishthira, who brings joy to the Paurava clan, thus was told to me in the past by Lord Vyasa, who is endowed with the rare wisdom and wisdom; therefore, I have made such an effort.॥ 26॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि बकवधपर्वणि कुन्तीयुधिष्ठिरसंवादे एकषष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १६१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत बकवधपर्वमें कुन्ती-युधिष्ठिर-संवादविषयक एक सौ इकसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥