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mahabharat 1.161.25: इसी प्रकार जो राजा अपने शरणागत शूद्र को प्राण संकट से बचाता है, वह इस लोक में उत्तम कुल में जन्म लेता है, धन-धान्य से संपन्न होता है और राजाओं द्वारा सम्मानित होता है ॥25॥   |   mahabharat अध्याय 1.161: भीमसेनको राक्षसके पास भेजनेके विषयमें युधिष्ठिर और कुन्तीकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 161: भीमसेनको राक्षसके पास भेजनेके विषयमें युधिष्ठिर और कुन्तीकी बातचीत  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.161.25 
शूद्रं तु मोचयेद् राजा शरणार्थिनमागतम्।
प्राप्नोतीह कुले जन्म सद्‍द्रव्ये राजपूजिते॥ २५॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार जो राजा अपने शरणागत शूद्र को प्राण संकट से बचाता है, वह इस लोक में उत्तम कुल में जन्म लेता है, धन-धान्य से संपन्न होता है और राजाओं द्वारा सम्मानित होता है ॥25॥
 
Similarly, the king who saves the Shudra who takes refuge in him from the danger of his life, is born in a noble family in this world, rich in wealth and respected by the kings. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)